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मुक्तक बारिश

तुम होती तो बारिश में भींग भी लेता तेरी बाहों में बाहें डाल झूम भी लेता भीगी हुई तुम क्या क़यामत लगती तेरे बदन को इसी बहाने चुम भी लेता